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भारतीयों को बेच दिया भारत सरकार ने ग्लोबल बैकों से

भारतीयों को बेच दिया भारत सरकार ने ग्लोबल बैकों से

भारतीयों को बेच दिया भारत सरकार ने

जैसा के अब सभी को समझ आ चुका होगा के वर्तमान भारत सरकार और उसे चलाने वालों का एकमात्र उद्देश ग्लोबल बैंकरों के समूह को लाभ पहुंचाना है|

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इस समय भारत सरकार की बागडोर ग्लोबल बैंकरो और चंद उद्योगपतियों के हाथों में है जिन का सर्वप्रथम उद्देश्य भारतीयों की बचत और कृय शक्ति को शुन्य के बराबर कर देना है.

साथ ही काले धन के नाम पर सभी की जमा पुंजि को बरबाद कर देना है जिस से की आप को अपनी हर जरूरत के लिये बैंकों से लोन लेना पडे, आप को शादी करनी है, छुट्टीयों में घूमने जाना है,  घर में रंग रोगन करवाना है तो आप को लोन लेना पड़ेगा..

इस के लिये यह भी जरूरी है की भारतीयों के पास मौजूद ज्यादा से ज्यादा धन को बरबाद कर देना, इस बात का  उदाहरण है 10 दिन रहते सरकार की ये घोषणा की एक व्यक्ति 5000 रुपये से ज्यादा की रकम नहीं जमा कर सकता है..    फिर 50 दिन कि अवधि के बाद रिजर्व बैंक में पैसे जमा करने का जो प्रावधान था उसे भी निरस्त कर दिया जबकि सरकार रिजर्व बैंक के द्वारा टैक्स काट कर भी पैसा लौटा सकती थी.. और अभी तक सरकार जनता को अपना ही पैसा बैंक से जरूरत के मुताबिक निकालने नहीं दे रही है.

सवाल यह उठता है कि क्याें नहीं जमा कर सकता है कोई अपना ही पैसा और क्यों नहीं निकाल सकता ?

परन्तु डिमोनिटाईजेशन की आड में भारतीयों को अपना बंधुआ मजदूर बनाने का खेल खेलने वाली ग्लोबल बैंको का मुख्य उद्देश्य भारतीयों का जमा पैसा बरबाद कर के उन्हें लोन और अपने बैंकिंग सिस्टम का गुलाम बनाना है .

क्या आपने कभी सोचा है  के आखिर क्यों बरबाद करने पे तुली है मोदी सरकार भारत वासियों की जीवन भर की जमा पुंजि ? भारतीय ऱूपये पर से दुनिया भर का भरोसा गिराकर क्या हासिल किया सरकार ने..भारत की आर्थिक संप्रभूता को पूरे विश्व के सामने उजागर किसके लिए किया गया..   किसको फायदा पहुंचाना चाहती है मोदी सरकार ?

ऱिलायंस ग्रुप को 25 से ज्यादा देशों में बडे बडे प्रोजेक्ट दिला दिये गये हैं…  इस समय पूरी दुनिया की मीडिया में अडाणी ग्रुप को अस्ट्रेलीया में कोल मांईस चलाने में वर्ल्ड बैंक के द्वारा अनैतिक सहयोग देने की जम कर आलोचना हो रही है परन्तु भारतीय मीडिया ने चुप्पी साध रखी है.. क्यों कि सच यही है की इस सरकार और इसके सहयोगीयों को ग्लोबल बैंकों ने दुनिया भर में लाखों करोड रुपये दे कर खरीद लिया है और जो वो चाह रहे हैं वो यह सरकार कर रही है.

ग्लोबल बैंकों के ही ईशारे पर सरकार जनता पर जोर जबरदस्ती से कैशलेस सिस्टम थोप रही है..इस के लिए वह लोगो को अपना ही पैसा अपनी मर्जी से निकालने पर प्रतिबंध लगा रखी है. . जिस से की लोग कैशलेस का ईस्तेमाल करने पे मजबूर हो जाए और ग्लोबल बैंकों की झोली घर बैठे भरती रहे.

कैशलेस सिस्टम में उपभोक्ता को जहाँ भी अपना डेबिट और क्रेडिट कार्ड स्वाइप करना होता है वहाँ गौरतलब है कि कार्ड द्वारा किये गए प्रत्येक लेन-देन पर बैंक शुल्क लेता है, और इस शुल्क का भुगतान उस व्यापारिक प्रतिष्ठान को भी करना होता है जिसने अपने यहाँ पीओएस टर्मिनल लगा रखा है।

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इस शुल्क को एमडीआर (merchant discount rate) के नाम से जाना जाता है। एमडीआर का एक हिस्सा उस बैंक के पास जाता है जिसने उपभोक्ता कार्ड जारी किया है, एक हिस्सा उस बैंक के पास जाता है जिसने संबंधित प्रतिष्ठान के पीओएस टर्मिनल को स्थापित किया है, जबकि एक हिस्सा भुगतान माध्यमों (payment getways) को जाता है, जैसे वीज़ा (visa) रूपे (rupay) और मास्टरकार्ड (mastercard) इत्यादि ग्लोबल बैंकों को.

आप सभी को ये भी को ये जान कर भी हैरानी होगी की वर्ल्ड बैंक भी ग्लोबल बैंकों के समूह  का बनाया हुआ एक छलावा है जो असल में एक  प्राइवेट बैंक से ज्यादा कुछ नहीं है और जिसने वर्ल्ड बैंक नाम के छलावे के साथ दुनिया भर के देशों में काम करने की मान्यता ले रखी है

देशों की इकोनोमी को अपने हिसाब से प्रभावित करना इस का काम है  ग्रीस, पेरू, जिम्बाबवे जैसे देशों को कर्जदार आैर कंगाल बनाने में वर्ल्ड बैंक का ही हाथ था

आप अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड को पलट कर देखें तो वहां आप VISA, MASTER CARD, DINERS CLUB, AMERICAN EXPRESS जैसे नाम और लोगो पायेंगे, ये सभी इन ग्लोबल बैंकों की संस्थाएं हैं.. जान लें की ATM से आप के द्वारा 100 रू निकालने पर भी इन विदेशी बैंकों को कमीशन प्राप्त होता है .

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यही कारण है की ये विदेशी बैंकों के समूह और वर्ल्ड बैंक चाहते हैं कि सभी के सभी भारतीयों को बैंकिंग सिस्टम के अधीन ले आया जाए.

यानि आप के द्वारा किए गये हर टरांजैक्शन पर ग्लोबल बैंकों को कमीशन प्राप्त होगा .. हमारी सरकार को इन ग्लोबल बैंकों को इतनी चिंता है की यह हमें इनका कैशलेस सिस्टम यूज करने के लिये जो डिस्काउंट दे रही है वह सब्सिडी के रूप में ग्लोबल बैंकों के खाते में जमा कर रही है.

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एक तरफ सरकार हमसे रसोई गैस की सब्सिडी छिनती है दूसरी तरफ स्वदेशी का राग अलापने वाली सरकार विदेशी बैंकों को हमारी सब्सिडी का पैसा पहुंचाने में शर्म भी नहीं महसूस करती है.

आखिर शर्म भी क्यों करे आखिर पैसा पहुंचाने के बदले सरकार चलाने वालों को भी पैसा मिल रहा है और इस मामले में तो जिंदगी भर मिलता रहेगा .

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Andolanrat

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